जब लखनऊ ने साक्षात सुने स्वर कोकिला लता मंगेशकर के सुर, तत्कालीन सीएम मुलायम थे मंच पर

लखनऊ[दुर्गाशर्मा]।

तुझेनगमोंकीजांअहलेनजरयूंहीनहींकहते

तेरेगीतोंकोदिलकाहमसफरयूंहीनहींकहते

सुनीसबनेमुहब्बतकीजबांआवाजमेंतेरी

धड़कताहैदिलेहिंदोस्तांआवाजमेंतेरी...

नौअप्रैल1995मेंस्वरकोकिलालतामंगेशकरकेलखनऊआगमनपरप्रख्यातसंगीतकारनौशादअलीनेयहपंक्तियांरचींथीं।तबसंगीतकीसाकारमूरतकोसाक्षात्देखनेकेलिएबेगमहजरतमहलपार्कमेंभीड़उमड़ीथी।बिंदादीनमंचपरहुएभव्यसमारोहमेंतत्कालीनमुख्यमंत्रीमुलायमसिंहयादवऔरनगरप्रमुखडा.अखिलेशदासऔरप्रख्यातसंगीतकारनौशादकीउपस्थितिमेंलतामंगेशकरकोएकलाखरुपयेकेअवधरत्नसेसम्मानितकियागया।इसमौकेपरलतामंगेशकरनेकबूतरजा...गानेंकीदोलाइनेंभीगाईथीं।

लतामंगेशकरसम्मानसमितिकेमहामंत्रीअतहरनबीनेबतायाकिजबवहएयरपोर्टपहुंचींतोमालूमहुआकिटेक्निकलस्टाफनेहड़तालकरदीऔरप्लेननहींउड़ेगातोवहवापसघरचलीगईं।तबतत्कालीनराज्यसरकारकीओरसेउन्हेंलखनऊलानेकेलिएप्लेनभेजागया।वहप्लेनसेदोपहरमेंकरीबदोबजेलखनऊपहुंचपाईंऔरशामकोछहबजेकार्यक्रमहुआ।पूरालखनऊउमड़ाथा।दूसरेदिनउनकेव्यक्तित्वऔरकृतित्वपरताजहोटलमेंसंगोष्ठीभीहुईथी।

जबलताजीनेसुनानौहाऔरमर्सियाःमुंबईमेंमेरागजलोंकाएल्बमआलमएमस्तीरिकार्डहोनाथा,लताजीकेस्टूडियोमेंपूरीरिकार्डिंगहुई।फिरमुझेवहमौकाभीमिला,जबलताजीनेमेरापढ़ाहुआनौहाऔरमर्सियाभीसुना।दरअसल,लताजीखुदउर्दूकीअच्छीजानकारथींऔरनौहाऔरमर्सियाभीपढ़तीथीं।उससमयवरिष्ठपत्रकार(मरहूम)यसारिजवीनेमुंबईमेंशियासमुदायसेएककैसेटलॉन्चकरनेकीयोजनापरबातकी।तयहुआकियादएहुसैननामकाएककैसेटआए,जोनौहेमर्सियेकासंग्रहहोगा।उनकेस्टूडियोकीरिकार्डिंगतयहुई।मैंइत्तेफाकसेअपनाहारमोनियमलानाभूलगईथी।फिरवहांमुझेएकहारमोनियमदियागया,बादमेंमालूमचलाकिवोलताजीकास्पेशलहारमोनियमथा।जबलताजीआशाजीऔरउषाजीकेसाथआईंतोवहअपनाहारमोनियमखोजनेलगीं।उन्हेंलगाहारमोनियमचोरीहोगया।उन्हेंनहींमालूमथाकिहमरिकार्डिंगकररहे।बादमेंमालूमचलाकिलखनऊसेएककलाकारआईहैं।लताजीस्टूडियोआईंऔरउन्होंनेआंखबंदकरमुझेसुना,फिरमेरेबारेमेंपूछा।जबवहपहुंचीतोलोगोंनेरिकार्डिंगरोककरहारमोनियमवापसकरनेकोकहा,परलताजीबोलीं-नहीं,मुझेसुननाहै।लताजीनेमेरानौहा,मर्सियाऔरसलामसुनाथा।मेरेउर्दूऔरलखनवीजुबानपरवहकायलहुईंऔरमुझेआशीर्वाददिया।मेरीहमेशासेआदतदोचोटीकरनेकीरहीहैऔरलताजीभीइसबातकेलिएमशहूरथीं।उन्होंनेमुझसेकहाकिमैंउनकीदोचोटीकीबालोंवालीस्टाइलकापीकररहीहूंऔरखूबखनखनातीहंसी।मेरीगुरुपटियालाघरानेकीबेगमअख्तरसाहिबा,मेरेगुरुउस्तादअफजलहुसैननगीनासाहबऔरबड़ेगुलामअलीखांसाहबऔरउस्तादबरकतअलीखांसाहबकाजिक्रछिड़ा।वोअविस्मरणीयपलथामेरेलिए।वहसंपूर्णकलाकारथीं,जोदूसरेकलाकारकोमान-सम्मानदेनाभीजानतीथीं।

-सुनीताझिंगरन,प्रख्यातशास्त्रीयगायिका

मैंनेआशाऔरऊषाजीदोनोंकेलिएगीतकंपोजकिएहैं,परलताजीकेसाथकामकीइच्छाअधूरीहीरहगई।लाकडाउनकेदौरानहमनेघरपररहें,घरपरसुनेंसांगीतिकश्रृंखलाशुरूकीथी।जबसौगीतरिकार्डहुएतोलताजीकाशुभकामनासंदेशभीआयाथा,जिसेहमलोगोंनेप्रसारितभीकियाथा।उसमहानआत्माकोमेराशत्शत्नमन।

-केवलकुमार,वरिष्ठसंगीतकार

एकबारउन्होंनेकंधेपररखाथाहाथ

सरस्वतीमांकाजाग्रतअवतारलताजीहमसबकेलिएईश्वरकीओरसेउपहारबनकरआईथीं।एकबारमुलाकातकेदौरानउन्होंनेमेरेकंधेपरहाथरखाथा,उसअहसासकोमैंआजभीमहसूसकरपातीहूं।एकबारउन्होंनेसार्वजनिकरूपसेमेरानामलेकरस्वीकाराथाकिमैंउनकेपसंदीदाकलाकारोंमेंसेएकहूं।यहमेरेलिएअकल्पनीय,अविश्वसनीयथा।लताजीनेसंगीतकाअद्भुतग्रामरसेटकियाकिसांसकीभीआवाजनआए,येउनकीखुदकीअपनीदेनथी।उन्होंनेऐसेसमयपरगानाशुरूकियाजबएकसेएकदिग्गजथे,परलताजीनेएकअलगयुगरचा।प्रथमश्रुतिकीगर्भनालजैसेआजटूटगई।लताजीकाबिछोहव्यक्तिगतआघातसाहै।देवीकोकृतज्ञप्रणाम...।

-मालिनीअवस्थी,लोकगायिका

कभीनखत्महोनेवालीप्रेरणास्रोत

दुर्भाग्यसेमेरीउनसेकभीव्यक्तिगतरूपसेमुलाकातनहींहुई,लेकिनमेरेजैसेअनगिनतभारतीयसंगीतजगतसेजुड़ेऔरहरभारतीयकेजीवनमेंलताजीहरमोड़परशामिलरहीहैं।इतनाकीशायदहीकिसीकोएसालगताहोगाकीवोउनसेमिलेनहीं।हमाराकोईभीत्योहार,शादीउत्सवउनकीकोकिलास्वरूपीआवाजकेबिनापूरानहींहोता।किसीभीभाषाकीफिल्मउनकेगाएगीतोंकेबिनापूरीनहींहोती।हमारेजन्मसेअबतककेजीवनमेंबचपनसेबुढ़ापेतकहरपीढ़ीकीयादोंमेंउनकीआवाजसमायीहुईहै।उनकेगाएहुएगानेकिसीनाकिसीयाद,किसीनाकिसीभावनासेजुड़ेरहतेहैं।उनकीउपस्थितिहमारेजीवनमेंउसतरहसेहै,जिसेअबकिसीशारीरिकउपस्थितिकीआवश्यकताहीनहीं।उनकीअमरआवाजकभीनाखत्महोनेवालाप्रेरणास्त्रोतबनकेहमेशासबकेजीवनमेंजीवितरहेगी।

-अनुपमाराग,गायिका

जबहमउनसेमिलनेपहुंचे

हमेंमालूमचलाकिलताजीगर्वनरहाऊसमेंठहरीहैं।तबमेरेभाईडाउपेंद्रकंचनगवर्नरहाऊसमेंबतौरचिकित्सकतैनातथे।उनकेजरियेमैंऔरमेरीपत्नीअर्चनाराजगवर्नरहाऊसकेअतिथिकक्षमेंउनसेमिलनेकेइंतजारमेंबैठेथे।जैसेहीवहआईंतोहमलोगोंनेउनकेपैरछुएऔरहमधन्यहोगए।हमदोनोंकाहीगायनसेबेहदलगावथा।हमेंआशीर्वाददेतेसमयउनकीकोहनीमेरेसिरमेंलगगई।मेरासिरसहलातेहुएतुरंतबोलीं-अरेलगीतोनहीं।वहअविस्मरणीयक्षणथा।

-तरुणराज,सचिव,उत्तरप्रदेशसंगीतनाटकअकादमी

मेरेनामकीविवेचनाकीथी

एकसाक्षात्कारकेसिलसिलेमेंलताजीसेपेडररोडपरस्थितउनकेआवासपरमुलाकातहुईथी।बहुतहीहौलेसेबोलनेवालीलताजीकीवाणीमेंआत्मीयताकीमिठासहीमिठासटपकतीथी।लताजीनेमेरेनामकाविश्लेषणकरतेहुएबतायाथाकिसर्वेशकाअर्थसिर्फशिवहोताहै।बादमेंबेगमहज़रतमहलपार्ककेबिंदादीनमंचपरहुएभव्यसमारोहमेंलताजीमौजूदथींऔरहमहतप्रभहोकरदर्शकदीर्घासेबसलताजीकोदेखेहीजारहेथे।

-सर्वेशअस्थाना,कवि